पटना: जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर गुरुवार शाम से गांधी मैदान में BPSC अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। उनकी इस कार्रवाई ने बिहार सरकार के प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। सरकार की ओर से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार गांधी मैदान भेजा जा रहा है, लेकिन प्रशांत किशोर अपने निर्णय पर अडिग हैं।
सरकार पर गंभीर आरोप
धरनास्थल पर पहुंचे पटना के एडीएम ने प्रशांत किशोर से अनशन समाप्त करने की अपील की। इस पर प्रशांत किशोर ने दो टूक जवाब दिया,
“धरना वापस लेना अब संभव नहीं है। हजारों बच्चों ने मुझ पर विश्वास किया है। 29 दिसंबर को प्रशासन के कहने पर मैंने छात्रों को उठने के लिए कहा था, लेकिन इसके बाद प्रशासन ने बच्चों पर क्रूरतापूर्वक लाठीचार्ज किया। अब किसी भी हालत में प्रशासन के कहने पर आंदोलन समाप्त नहीं होगा।”
अनशन समाप्त करने की शर्त
प्रशांत किशोर ने साफ किया कि यह आंदोलन तभी समाप्त होगा जब मुख्यमंत्री खुद अभ्यर्थियों से मिलेंगे, उनकी बातों को सुनेंगे, और समाधान का रास्ता निकालेंगे। उन्होंने कहा,
“बच्चे खुद तय करेंगे कि उन्हें आगे क्या करना है। उनका निर्णय मुझे स्वीकार होगा।”
छात्रों के बीच बढ़ा समर्थन
गांधी मैदान में हजारों की संख्या में जुटे छात्रों ने प्रशांत किशोर के इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। उनके समर्थन में नारों की गूंज से गांधी मैदान का माहौल गर्म हो चुका है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
प्रशांत किशोर के इस आंदोलन से बिहार सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। छात्र लगातार पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और लाठीचार्ज के खिलाफ न्याय की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि सरकार इस स्थिति को संभालने के लिए क्या कदम उठाती है।






