Bole Bharat Times, Desk: बिहार की राजनीति में नए साल की शुरुआत बड़े सियासी बदलावों की संभावनाओं के साथ हुई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने 1 जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए राज्य में सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं को हवा दे दी। इस बयान के बाद से बिहार का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। अब लालू प्रसाद ने 18 जनवरी को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
बैठक का एजेंडा क्या हो सकता है?
राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की यह बैठक लालू प्रसाद के निर्देश पर बुलाई गई है। इसमें पार्टी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों को शामिल होने का निर्देश दिया गया है। माना जा रहा है कि बैठक में लालू प्रसाद द्वारा नीतीश कुमार के साथ दोस्ती की पहल पर चर्चा हो सकती है।
इसके साथ ही इस साल कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की रणनीति पर भी मंथन होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू प्रसाद आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार में विपक्षी दलों के साथ गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।
लालू प्रसाद के बयान के बाद पार्टी के ज्यादातर नेताओं ने इसे सही ठहराया है। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई सीधा बयान नहीं दिया है, लेकिन पार्टी के अन्य नेताओं ने लालू प्रसाद के बयान का समर्थन करते हुए नीतीश कुमार के साथ संभावित सरकार बनाने की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं।
लालू प्रसाद के इस कदम से बिहार की राजनीति में उथल-पुथल का दौर शुरू हो गया है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों इस बयान को लेकर सतर्क हो गए हैं। जदयू नेताओं ने इसे राजद की राजनीतिक चाल बताया है, जबकि भाजपा ने इसे महागठबंधन की विफलता का प्रतीक बताया है।
नीतीश-लालू गठबंधन की संभावनाएं
नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव पहले भी साथ आ चुके हैं। 2015 में महागठबंधन की सरकार ने भाजपा को पटखनी दी थी। हालांकि, 2017 में नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई। अब लालू प्रसाद की पहल को 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर महागठबंधन को पुनर्जीवित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
राजद की 18 जनवरी की बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। इस बैठक में लालू प्रसाद क्या फैसला लेंगे, इससे बिहार की सियासत की दिशा तय हो सकती है। क्या बिहार में सत्ता परिवर्तन की जमीन तैयार हो रही है, या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है, यह देखने वाली बात होगी।
फिलहाल, बिहार की राजनीति में सियासी सरगर्मी चरम पर है, और आने वाले दिनों में इसके बड़े बदलावों का गवाह बनने की संभावना है।





