Bole Bharat Times, Desk: मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में गुरुवार को बड़ा मोड़ आया, जब विशेष एससी/एसटी कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर, शाइस्ता परवीन उर्फ मधु और कृष्णा को बरी कर दिया। यह फैसला प्रभारी न्यायाधीश अजय कुमार मल्ल ने सुनाया।
विशेष सुरक्षा के बीच तीनों आरोपितों को तिहाड़ जेल से कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस जांच में कई खामियां थीं, जिसके चलते आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। लोक अभियोजक जय मंगल प्रसाद ने भी स्वीकार किया कि कमजोर जांच के कारण आरोपियों को बरी करना पड़ा।
यह मामला 2018 में सुर्खियों में आया था, जब मुजफ्फरपुर के स्वधार गृह से 11 महिलाओं और उनके चार बच्चों के लापता होने का खुलासा हुआ था। बालिका गृह कांड में बृजेश ठाकुर पहले ही आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
कोर्ट के फैसले के बाद तीनों आरोपितों को वापस तिहाड़ जेल भेज दिया गया। शाइस्ता परवीन के वकील अन्नू बाबू ने अदालत के फैसले पर संतोष जताते हुए इसे न्याय की जीत बताया।
इस केस ने बिहार में महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। हालांकि, आरोपियों के बरी होने से यह मामला फिर से विवादों के केंद्र में आ गया है।






