पटना: देशभर में भाजपा इस समय संगठन पर्व मना रही है। इसी क्रम में राज्यों में सदस्यता अभियान के साथ-साथ जिला अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया जारी है। बिहार भाजपा में इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को चुनाव पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।
बिहार भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज
वर्तमान में बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल हैं। कुछ महीने पहले उन्होंने सम्राट चौधरी की जगह यह पद संभाला था। हालांकि, 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा नेतृत्व को प्रदेश अध्यक्ष के चयन में काफी सतर्कता बरतनी होगी।
क्या दिलीप जायसवाल को मिलेगा दूसरा मौका?
दिलीप जायसवाल पार्टी के पुराने नेता हैं और गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। सिमांचल क्षेत्र में उनका प्रभाव ठीक-ठाक है, लेकिन राज्य स्तर पर उनकी पहचान कमजोर मानी जाती है। उनकी जाति बनिया समुदाय से है, और भाजपा के इस कोर वोट बैंक को साधने के लिए पार्टी उन्हें फिर मौका दे सकती है। हालांकि, संगठन में यह चर्चा भी है कि राज्यभर में कमजोर पकड़ को देखते हुए किसी और अनुभवी चेहरे को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
अन्य दावेदार कौन हैं?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई और नाम भी चर्चा में हैं:
- जनक राम: बसपा से भाजपा में शामिल हुए जनक राम ने दलित समुदाय में अपनी अच्छी पकड़ बनाई है। दलित वोट बैंक को भाजपा के पक्ष में लाने के लिए पार्टी उन पर दांव खेल सकती है।
- संजीव चौरसिया: पटना के प्रतिष्ठित नेता और कायस्थ समुदाय के प्रतिनिधि हैं। उनके नाम पर भी चर्चा हो रही है।
- राजेंद्र गुप्ता: संगठन में गहरी पैठ और कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पकड़ रखने वाले नेता हैं।
मनोहर लाल खट्टर पर बड़ी जिम्मेदारी
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बिहार में प्रदेश अध्यक्ष चयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह निर्णय दर्शाता है कि भाजपा नेतृत्व इस बार किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहता। खट्टर का अनुभव और निर्णय क्षमता बिहार भाजपा के लिए अहम साबित हो सकती है।
भाजपा की रणनीति और बिहार चुनाव
2025 में बिहार विधानसभा चुनाव हैं, और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का चेहरा चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाएगा। जहां एक तरफ पार्टी जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी तरफ ऐसे नेता का चयन करना होगा, जो संगठन को मजबूती दे सके और जमीनी कार्यकर्ताओं में उत्साह भर सके।
क्या भाजपा दिलीप जायसवाल को फिर मौका देगी, या नए चेहरे पर दांव लगाएगी? यह फैसला आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति की दिशा तय करेगा।
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