पटना: रविवार को बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अभ्यर्थियों पर पटना पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज ने विवाद खड़ा कर दिया है। लाठीचार्ज में कई अभ्यर्थी घायल हो गए हैं। अभ्यर्थियों की मांग है कि परीक्षा में हुई अनियमितताओं के कारण उन्हें री-एग्जाम चाहिए।
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के आव्हान पर अभ्यर्थी पटना के गांधी मैदान में एकत्र हुए और मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च किया। हालांकि, पुलिस ने उन्हें जेपी गोलंबर पर रोक दिया। प्रशांत किशोर एक घंटे बाद वहां से चले गए, जिसके बाद पटना पुलिस ने अभ्यर्थियों को हटने का अनुरोध किया। लेकिन जब अभ्यर्थी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने की जिद पर अड़े रहे, तो पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और फिर लाठीचार्ज किया।
अभ्यर्थियों का आरोप: ‘प्रशांत किशोर ने राजनीति के लिए इस्तेमाल किया’
घटनाक्रम के बाद अभ्यर्थियों ने प्रशांत किशोर पर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि प्रशांत किशोर ने उन्हें सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए आगे किया और खुद पीछे हट गए। “हमें राजनीति के लिए इस्तेमाल किया गया और पुलिस की लाठियां खाने के लिए छोड़ दिया गया,” एक अभ्यर्थी ने कहा।
पुलिस ने दर्ज की FIR
इस मामले में पटना पुलिस ने प्रशांत किशोर समेत 21 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि इन लोगों ने भीड़ को उकसाया, जिसके चलते कानून व्यवस्था बिगड़ी।
गर्दनीबाग में धरना जारी
घटना के बाद भी कई अभ्यर्थी गर्दनीबाग धरनास्थल पर डटे हुए हैं और परीक्षा रद्द कर री-एग्जाम कराने की मांग पर अड़े हैं।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
अभ्यर्थियों ने सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने की मांग कर रहे थे, लेकिन कोई भी सरकारी अधिकारी या प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं पहुंचा।
BPSC अभ्यर्थियों का यह आंदोलन राज्य में युवाओं की नाराजगी और बेरोजगारी के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ले आया है। अब देखना यह है कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।






