*आज का भारत: ग्रामीण-शहरी डिजिटल गैप कैसे भरें?*
*परिचय*
भारत आज डिजिटल क्रांति के दौर से गुजर रहा है। शहरों में जहाँ 5G इंटरनेट, ऑनलाइन पेमेंट, और एआई-आधारित सेवाएँ रोजमर्रा का हिस्सा बन चुकी हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में अब भी इंटरनेट की धीमी गति, डिजिटल साक्षरता की कमी और संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती है।
ग्रामीण-शहरी डिजिटल गैप सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता का भी प्रतीक बन गया है।
*डिजिटल गैप क्या है?*
डिजिटल गैप या डिजिटल डिवाइड का मतलब है —
“ऐसी खाई जो उन लोगों के बीच होती है जिनके पास आधुनिक सूचना व संचार तकनीक तक पहुँच है, और जिनके पास नहीं।”
भारत में यह अंतर गाँव और शहर, अमीर और गरीब, शिक्षित और अशिक्षित वर्गों के बीच स्पष्ट दिखता है।
*स्थिति एक नज़र में*
भारत में इंटरनेट यूज़र्स की संख्या 90 करोड़ से अधिक हो चुकी है, लेकिन
ग्रामीण भारत में केवल लगभग 35–40% आबादी के पास ही स्थायी इंटरनेट कनेक्शन है।
डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन शिक्षा का लाभ मुख्यतः शहरों में सीमित है।
*डिजिटल गैप के प्रमुख कारण*
इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी
कई गाँव आज भी नेटवर्क के भरोसे नहीं हैं।
डिजिटल साक्षरता की कमी
स्मार्टफोन होने के बावजूद लोग इसके उपयोग से अनजान हैं।
महिलाओं की सीमित भागीदारी
ग्रामीण महिलाओं की डिजिटल पहुँच पुरुषों से आधी है।
सस्ती तकनीक की अनुपलब्धता
डिवाइस और डेटा प्लान अब भी महंगे हैं।
*समाधान के रास्ते*
भारतनेट जैसी योजनाओं का सशक्त क्रियान्वयन
हर पंचायत तक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पहुँचाना।
डिजिटल साक्षरता अभियान
स्कूलों, पंचायतों और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से प्रशिक्षण।
स्थानीय भाषा में डिजिटल सामग्री
हिन्दी, भोजपुरी, बंगाली, मराठी आदि भाषाओं में ऐप और वेबसाइट।
महिलाओं व युवाओं को टेक-सशक्त बनाना
‘डिजिटल दादी’ या ‘ग्रामीण इनोवेटर’ जैसे मॉडल प्रेरणादायक हैं।
सस्ती और टिकाऊ तकनीक
लो-कॉस्ट स्मार्टफोन, सोलर-पावर्ड डिवाइस और मुफ्त वाई-फाई ज़ोन।
*निष्कर्ष*
भारत का भविष्य तभी सशक्त होगा जब हर गाँव डिजिटल भारत से जुड़ा होगा।
शहरों की चमक तभी अर्थपूर्ण बनेगी जब ग्रामीण भारत भी समान अवसरों का भागीदार हो।
डिजिटल गैप मिटाना — सिर्फ नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता बननी चाहिए।



