चुनाव से पहले नीतीश कुमार को लगा झटका,नेताओं ने दिया इस्तीफा

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सारण में जद(यू) जिलाध्यक्ष अल्ताफ आलम के खिलाफ बगावत, कई नेताओं का इस्तीफा

सारण में जद(यू) जिलाध्यक्ष अल्ताफ आलम के खिलाफ पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आ गया है। संगठन के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनकी कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम ने जद(यू) के अंदरूनी संकट को उजागर कर दिया है, जिससे पार्टी में बड़ी हलचल मची हुई है।

पार्टी में बढ़ते असंतोष की वजहें

अल्ताफ आलम की कार्यशैली को लेकर पार्टी के अंदर लंबे समय से असंतोष पनप रहा था। आरोप है कि वे संगठन में मनमाने तरीके से फैसले ले रहे थे और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर बाहरी लोगों को आगे बढ़ा रहे थे।

इसके अलावा, उनका छपरा के बड़े भूमि कारोबारियों से करीबी संबंध बताया जा रहा है। आरोप है कि वे अपनी नजदीकी रईस खान का नाम लेकर कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाते हैं और संगठन में बाहरी लोगों को शामिल कर रहे हैं।

2020 के चुनाव में हार और मुस्लिम वोटों की नाराजगी

अल्ताफ आलम 2020 में भी जिलाध्यक्ष थे और मढ़ौरा विधानसभा से जद(यू) के उम्मीदवार बने थे। हालांकि, उस चुनाव में जद(यू) सारण जिले में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी।

पार्टी के मुस्लिम वोटरों का भी मोहभंग हो गया था, और वे जद(यू) के साथ नहीं रहे। इस हार के बाद भी अल्ताफ आलम ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से संवाद नहीं किया, जिससे असंतोष और गहरा गया।

कई बड़े नेताओं का इस्तीफा

अल्ताफ आलम की नीतियों और कार्यशैली से नाराज होकर पार्टी के कई बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया।

 

 

 तसर्फ़ी हुसैन (उपाध्यक्ष, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ)

 शम्स परवेज (महासचिव, मूल पार्टी सारण)

अन्नू खान (समताकालीन नेता)

प्रभावती कुशवाहा (नगर अध्यक्ष, मढ़ौरा) ने सैकड़ों महिलाओं के साथ इस्तीफा दिया।

 

पटना मुख्यालय में शिकायत, जांच रिपोर्ट पर अब तक सस्पेंस

अल्ताफ आलम के खिलाफ सारण से 200 से अधिक कार्यकर्ता और कई प्रकोष्ठ के पदाधिकारी पटना मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने मंत्री अशोक चौधरी, मंत्री सुमित सिंह, एमएलसी संजय गांधी, राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर गंभीर आरोप लगाए और उन्हें तत्काल हटाने की मांग की।

इसके बाद प्रदेश मुख्यालय ने एक जांच कमेटी गठित की, जिसमें राणा रणधीर सिंह और कई अन्य पदाधिकारियों को शामिल किया गया। यह टीम सारण आई और एक-एक कार्यकर्ता से अकेले में मिलकर उनका बयान रिकॉर्ड किया।

हालांकि, कार्यकर्ताओं के बीच गहरी नाराजगी है कि आज तक इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया और ना ही इस पर कोई ठोस फैसला लिया गया। इससे जदयू) के स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष और बढ़ता जा रहा है।

 

जिलाध्यक्ष की तस्वीर वायरल, संगठन में बढ़ा आक्रोश

अल्ताफ आलम की हाल ही में एक तस्वीर रईस खान और जावेद अब्दुल्ला पप्पू के साथ वायरल हुई, जिससे विवाद और बढ़ गया। जावेद अब्दुल्ला पप्पू खुद जद(यू) के जिला महासचिव हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे पार्टी के कोर समर्थकों की अनदेखी कर बाहरी लोगों को संगठन में जगह दे रहे हैं।

क्या पार्टी नेतृत्व लेगा कोई बड़ा फैसला?

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जद(यू) नेतृत्व अल्ताफ आलम के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा या नहीं।

कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर आलाकमान ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो विरोध और तेज होगा।

स्थानीय स्तर पर जद(यू) का कैडर नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है।

अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह विवाद आगामी चुनावों में जद(यू) के लिए बड़ा नुकसान बन सकता है।

ब्यूरो रिपोर्ट: बोले भारत टाइम्स

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