आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सभी पार्टी अपने अपने हिसाब से बाहुबलियों पर दांव लगाना शुरू कर दिया है।

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आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सभी पार्टी अपने अपने हिसाब से बाहुबलियों पर दांव लगाना शुरू कर दिया है।

मंच और माहौल दोनों सजने लगे हैं। सूबे की सभी पार्टियों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से बाहुबलियों पर दांव लगाना शुरू कर दिया है। कोर्ट की रिहाई के बाद कुछ सीधे चुनावी मैदान में होंगे तो कुछ के सामने नियमों का तकाजा होगा। वे अपने परिवार के सहारे अपनी सियासत चमकाएंगे ।

जदयू, राजद, बीजेपी, एलजेपी हर किसी के तरकश में अपने-अपने बाहुबली हैं। बोले भारत की इस स्पेशल रिपोर्ट में हम आपको ऐसे बाहुबलियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो 2025 विधानसभा चुनाव का समीकरण तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। आगे इस रिपोर्ट में बताएँगे की सभी बाहुबलियों का सियासी सफर और क्राइम रिकॉर्ड क्या रहा है || तो आइए चर्चा करते अनंत सिंह का

इस चुनाव में अनंत सिंह नीतीश कुमार के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों से अनंत सिंह और नीतीश कुमार के रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे थे। नीतीश कुमार पर अनंत सिंह को जान-बूझ कर फंसाने का आरोप लग रहा था। अब अनंत सिंह आजाद हैं तो ना केवल मोकामा की सीट, बल्कि मगध के साथ-साथ अन्य इलाकों के भूमिहारों की नाराजगी दूर करने के जिम्मेदारी अनंत सिंह अपने कंधे पर उठा सकते हैं। अब आइए जानते हैं उनके सियासी सफर और क्राइम रिकॉर्ड

 

सियासी सफर

* 2005 में पहली बार मोकामा से चुनाव लड़े और जीते
* 2010 में जेडीयू के टिकट पर जीत हासिल की
* 2015 के चुनाव में सीएम नीतीश कुमार से संबंध बिगड़े, मोकामा से निर्दलीय लड़े और जीते

क्राइम रिकॉर्ड

* 2020 के चुनावी हलफनामों के मुताबिक उन पर हत्या, अपहरण, रेप और रंगदारी जैसे 38 मामले बिहार के विभिनन्न थानों में दर्ज थे।
* 2020 का चुनाव जेल से जीते।
* सदस्यता गई तो 2022 में जेल से ही अपनी जगह पत्नी को उपचुनाव जिताया।
* कोर्ट से लगभग सभी मामलों में उन्हें राहत मिल गई है।

अब बात करते है आनंद मोहन की

सीएम नीतीश कुमार और आनंद मोहन की मित्रता अब सियासत में किसी से छुपी नहीं है। आनंद मोहन चुनावी चौसर के कितने माहिर खिलाड़ी हैं, जेल से निकलते ही उन्होंने इसे साबित कर दिया है। लोकसभा के बाद अब विधानसभा चुनाव में आनंद मोहन जदयू में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल, उनके बड़े बेटे चेतन आनंद शिवहर से विधायक हैं। ऐसे में उनका एक बार फिर से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। बेटे को चुनाव जिताने के साथ-साथ पार्टी से नाराज राजपूत समाज को भी जोड़ने की जिम्मेदारी होगी। कोसी को आनंद मोहन का गढ़ माना जाता है| इस स्थिति में ये बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

आइए अब जानते हैं उनके सियासी सफर और क्राइम रिकॉर्ड

सियासी सफर

* 1977 में एक्टिव पॉलिटिक्स में एंट्री
* 1980 में समाजवादी क्रांति सेना की स्थापना की
* 1990 में जनता दल के टिकट पर महिषी से पहली बार विधायक बने
* 1993 में बिहार पिपुल्स पार्टी बनाई
* 1995 में चुनाव हार गए
* 1996 का उपचुनाव में शिवहर लोकसभा सीट से जेल से चुनाव लड़ा और जीते

क्राइम रिकॉर्ड

* फिलहाल कोई केस दर्ज नहीं है
* IAS जी कृष्णैया हत्याकांड की सजा पूरी कर अब रिहा हो चुके हैं
* इससे संबंधित केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है
* 1998 का लोकसभा चुनाव भी इसी सीट से जीते और आरजेडी को समर्थन दिया
* 1999 में BJP का दामन थामा और चुनाव लड़े, हार गए
* अब जेल से रिहा होने के बाद पत्नी को शिवहर से सांसद बनाया

अब बात करते है सुनील पांडेय की

अब हरा और नीला झंडे से बाहर निकल कर सुनील पांडेय भगवाधारी हो गए हैं। अपने साथ उन्होंने अपने बेटे को भी भाजपा की सदस्यता दिलाई है। माना जा रहा है कि तरारी विधानसभा उपचुनाव में बेटे को टिकट मिल सकता है। 2025 से पहले यही इनका लिटसम टेस्ट भी होगा।

सुनील पांडेय सियासी सफर

* 2000 में समता पार्टी के टिकट पर रोहतास के पीरो से विधायक बने।
* 2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए और फरवरी और नवंबर, दोनों बार जेडीयू के टिकट पर जीते।
* 2015 में लोजपा में शामिल हो गए।
* 2015 और 2020 में तरारी से पत्नी को मैदान में उतारा, दोनों बार हार मिली।

क्राइम रिकॉर्ड

* साल 2000 तक बिहार के विभिन्न थानों में 50 से ज्यादा मामले दर्ज थे।
* सुनील पांडेय को कोर्ट से लगभग तमाम मामलों से राहत मिल गई है
इसमें अपहरण, मर्डर जैसे संगीन मामले शामिल थे।

अब बात करते है पप्पू यादव की

बाहुबली पप्पू यादव 10 साल बाद एक बार फिर से लोकसभा पहुंच गए हैं। इन्होंने अपनी पार्टी जन अधिकार पार्टी (जाप) का कांग्रेस में विलय कर लिया हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव निर्दलीय लड़ा। अब पप्पू यादव विधानसभा चुनाव में सीमांचल में अपनी ताकत पार्टियों को दिखाना चाहते हैं। चुनाव जीतने के बाद वे लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को खुला चैलेंज दे रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के बाहर रहकर पप्पू यादव कांग्रेस को ताकतवर बनाने की कोशिश करेंगे।

फिलहाल पप्पू यादव का पूरा फोकस सीमांचल पर है। इस स्थिति में पप्पू यादव विधानसभा चुनाव में सीमांचल का बड़ा चेहरा बन सकते हैं। सूत्रों की मानें तो वे अपने बेटे को भी पहली बार विधानसभा चुनाव में उतार सकते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान लालू यादव ने उनके बेटे को सुपौल सीट का ऑफर की थी।

पप्पू यादव सियासी सफर

* 52 साल की उम्र में पप्पू यादव 6 बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं।
* 1990 में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीते।
* 1991, 1996, 1999, 2004, 2014 और 2024 में लोकसभा पहुंचे।
* 2015 में अपनी पार्टी बनाई, लोकसभा चुनाव भी लड़े, हार गए।
* पप्पू यादव को कभी लालू का उत्तराधिकारी माना जाता था।

क्राइम रिकॉर्ड

* कोसी पर वर्चस्व के लिए आनंद मोहन और पप्पू यादव की अदावत की कहानी पूरा बिहार जानता है।
* CBI की विशेष अदालत ने आरोपी बनाया और गिरफ्तारी हुई।
* लंबे समय तक असम और तिहाड़ जेल में बंद रहे।
* 1999 में लेफ्ट नेता अजीत सरकार हत्याकांड में नाम शामिल होने के बाद इनके करियर पर ब्रेक लगा।
* 2008 में इसी मामले में उम्र कैद की सजा हुई।
* 2013 में सबूत के अभाव में पटना हाईकोर्ट से बरी हुए।

अब बात करते है अशोक महतो की

अब अशोक महतो विधानसभा चुनाव में शेखपुरा, नवादा और नालंदा की 8-10 विधानसभा सीटों पर अपनी ताकत दिखा सकते हैं। नवादा में राजबल्लभ यादव की भरपाई लालू यादव इनकी मदद से कर सकते हैं। इसके अलावा अशोक महतो की मदद से नीतीश के कोर वोट बैंक लव-कुश में सेंधमारी की भी तैयारी है।

सियासी सफर

* 2024 लोकसभा चुनाव में मेन स्ट्रीम पॉलिटिक्स में शामिल हुए।
* इससे पहले वे पर्दे के पीछे से समर्थन करते थे।
* भतीजे प्रदीप महतो को दो बार वारिसलीगंज विधानसभा से चुनाव जितवा चुके हैं।

क्राइम रिकॉर्ड

* बिहार में जातीय हिंसा का एक बड़ा आरोपी माना जाता है।
* इनके नाम पर कई नरसंहार दर्ज हैं।
* सबसे भयावह है अपसढ़ नरसंहार, जिसमें 11 लोगों की हत्या का आरोप लगा।
* नवादा जेल ब्रेक कांड, राजो सिंह हत्याकांड, अपहरण, मर्डर, लूट और फिरौती के कई केस दर्ज है।
* फिलहाल सभी मामलों से बरी हो चुके हैं।

अब बात करते हैं हिना शहाब की

बाहुबली शहाबुद्दीन के निधन के बाद सीवान का पूरा राजनीतिक समीकरण बिगड़ गया है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा किसी पार्टी को हो रहा है तो वो है राजद। हिना शहाब राजद से दो चुनाव हारने के बाद 2024 का लोकसभा चुनाव निर्दलीय लड़ी थी। इसमें वो कामयाब नहीं रहीं।

अब लालू यादव एक बार फिर से शाहबुद्दीन की विरासत को अपने खेमे में करने जुट गए हैं। सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं की माने तो हिना और लालू-तेजस्वी के बीच एक राउंड की मीटिंग हुई है। विधानसभा चुनाव में उनके बेटे ओसामा शहाब भी अपनी किस्मत आजमा सकते हैं।

ये बाहुबली भी कर सकते हैं वापसी

इन सबके अलावा भी कई बाहुबली हैं, जो पिछले कुछ सालों से चुनावी ग्राउंड से दूर हैं। वे विधानसभा चुनाव में वापसी कर सकते हैं। इनमें सबसे ऊपर बाहुबली सूरजभान सिंह का नाम शामिल है। लोजपा में बंटवारे के बाद लगभग वे मेन स्ट्रीम पॉलिटिक्स से दूर हैं। अब इस बात की चर्चा तेज है कि वे भी अपने बेटे के साथ भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इनके अलावा बाहुबली राजन तिवारी के भाई राजू तिवारी लोजपा (आर) के प्रदेश अध्यक्ष है, लेकिन फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं है। इस बार विधानसभा चुनाव में वे भी अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। बोले भारत रिपोर्ट

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